Baglamukhi Mata -बगलामुखी माता

Baglamukhi Mata

बगलामुखी देवी हिन्दू धर्म में दश महाविद्याओं में से एक हैं और शक्ति की देवी मानी जाती हैं। उन्हें विजय, अधिकार, और शत्रु पर विजय प्राप्त करने की देवी के रूप में पूजा जाता है। देवी बगलामुखी की उपासना से साधक को जीवन में आने वाली विभिन्न बाधाओं, विपत्तियों और शत्रुओं से मुक्ति मिलती है। … Read more

Ganapati Atharvashirsha

Ganapati Atharvashirsha

॥ श्री गणेशाय नम: ॥ ॐ भद्रं कर्णेभि शृणुयाम देवा: ।भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्रा: ॥स्थिरै रंगै स्तुष्टुवां सहस्तनुभि: ।व्यशेम देवहितं यदायु: ॥ १ ॥ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवा: ।स्वस्ति न: पूषा विश्ववेदा: ।स्वस्ति न स्तार्क्ष्र्यो अरिष्ट नेमि: ॥स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु ॥ २ ॥ ॐ शांति: ॥ शांति: ॥ शांति: ॥ ॐ नमस्ते गणपतये। त्वमेव प्रत्यक्षं तत्वमसित्वमेव केवलं … Read more

Bhaktamar Stotra

Bhaktamar Stotra

भक्तामरस्तोत्रम् संस्कृत कालजयी महाकाव्य श्रीमन्मानतुङ्गाचार्य-विरचितम् भक्तामर-प्रणत-मौलि-मणि-प्रभाणा-मुद्योतकं दलित-पाप-तमो-वितानम् ।सम्यक्-प्रणम्य जिन प-पाद-युगं युगादा-वालम्बनं भव-जले पततां जनानाम् ॥1॥ य: संस्तुत: सकल-वां मय-तत्त्व-बोधा-दुद्भूत-बुद्धि-पटुभि: सुर-लोक-नाथै: ।स्तोत्रैर्जगत्-त्रितय-चित्त-हरैरुदारै:,स्तोष्ये किलाहमपि तं प्रथमं जिनेन्द्रम् ॥2॥ बुद्ध्या विनापि विबुधार्चित-पाद-पीठ!स्तोतुं समुद्यत-मतिर्विगत-त्रपोऽहम् ।बालं विहाय जल-संस्थित-मिन्दु-बिम्ब-मन्य: क इच्छति जन: सहसा ग्रहीतुम् ॥3॥ वक्तुं गुणान्गुण-समुद्र ! शशांक-कान्तान्,कस्ते क्षम: सुर-गुरु-प्रतिमोऽपि बुद्ध्या ।कल्पान्त-काल-पवनोद्धत-नक्र-चक्रं ,को वा तरीतुमलमम्बुनिधिं भुजाभ्याम् ॥4॥ सोऽहं तथापि तव … Read more

स्वस्तिक

Swastik

स्वस्तिक, जिसका अर्थ है “शुभ” या “सौभाग्यशाली”, एक प्राचीन प्रतीक है जिसका उपयोग कई संस्कृतियों में होता है। यह चिन्ह विशेष रूप से हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म, और कई अन्य एशियाई और प्राचीन सभ्यताओं में महत्वपूर्ण है। स्वस्तिक का प्रतीक आमतौर पर चार भुजाओं वाला क्रॉस होता है, जिसमें प्रत्येक भुजा 90 डिग्री … Read more

Sapne me mara hua aadmi dekhna

Sapne me mara hua aadmi dekhna

स्वप्न शास्त्र (Swapna Shastra) के अनुसार सपने में मृत व्यक्ति को देखना कई चीजों का संकेत हो सकता है. आइए देखें कुछ संभावनाएं: शुभ संकेत अशुभ संकेत सपने में मरे हुए व्यक्ति को देखने का अर्थ सपने में मरे हुए व्यक्ति को देखने का अर्थ स्वप्न शास्त्र में कई तरह से व्याख्या किया जा सकता … Read more

Shri Yantra :श्री यंत्र

Shri Yantra

चक्र पूजा या यंत्र पूजा किसी देवता की एक आरेखीय रूप में पूजा है। यह पूजा केवल भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया के अन्य हिस्सों में भी पाई जाती है। देवताओं में सबसे महान, भगवान शिव को तांत्रिक विज्ञानों का आदिगुरु माना जाता है। उनकी संगिनी माता शक्ति, सृष्टि को संचालित करने वाली सम्पूर्ण … Read more

Saraswati Aarti

Saraswati Aarti lyrics

विद्वानों के अनुसार ‘सरस्वती’ शब्द की व्युत्पत्ति ‘सृ’ धातु और ‘असुन्’ प्रत्यय से मिलकर ‘सरस्’ शब्द बनता है। ‘सरस्’ का अर्थ है ‘गति’ या ‘प्रसारण’, और जो इस गति की अधिष्ठान देवी हैं, वही सरस्वती हैं। ‘सृ’ धातु का अर्थ गति है और गद्य-पद्य आदि के रूप में जिसका संसार में प्रसारण होता है, वह … Read more

विवाह मुहूर्त 2024

शादी केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं होती, बल्कि यह दो परिवारों के बीच भी संबंध स्थापित करती है। इस महत्वपूर्ण सामाजिक संस्था का भारतीय समाज में विशेष महत्व है और इसे बहुत सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। विवाह के दिन, दोनों व्यक्ति एक-दूसरे के साथ जीवन के हर सुख-दुख में साथ निभाने … Read more

अपराजिता स्तोत्र हिंदी में

Aparajita stotra in Hindi

अपराजिता देवी ध्यान:  ॐ निलोत्पलदलश्यामां भुजंगाभरणानिव्ताम।शुद्ध्स्फटीकंसकाशां चन्द्र्कोटिनिभाननां॥शड़्खचक्रधरां देवीं वैष्णवीं अपराजिताम।बालेंदुशेख्रां देवीं वर्दाभाय्दायिनीं।नमस्कृत्य पपाठैनां मार्कंडेय महातपा:॥ मार्कंडेय उवाच: शृणुष्वं मुनय: सर्वे सर्व्कामार्थ्सिद्धिदाम।असिद्धसाधनीं देवीं वैष्णवीं अपराजिताम्॥ विष्णोरियमानुपप्रोकता सर्वकामफलप्रदा।सर्वसौभाग्यजननी सर्वभितिविनाशनी।सवैश्र्च पठितां सिद्धैविष्णो: परम्वाल्लभा ॥ नानया सदृशं किन्चिदुष्टानां नाशनं परं ।विद्द्या रहस्या, कथिता वैष्ण्व्येशापराजिता ।पठनीया प्रशस्ता वा साक्शात्स्त्वगुणाश्रया ॥ ॐ शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजं।प्रसन्नवदनं ध्यायेत्सर्वविघ्नोपशान्तये ॥ अथात: संप्रवक्ष्यामी हृाभ्यामपराजितम् … Read more

अपराजिता स्तोत्र

अपराजिता स्तोत्र हिन्दू धर्म में एक विशेष प्रार्थना है जिसे देवी दुर्गा की अपराजित रूप की उपासना के लिए किया जाता है। “अपराजिता” का अर्थ होता है “जिसे कोई पराजित नहीं कर सकता”। इस स्तोत्र का पाठ करने से भक्तों को शक्ति मिलती है और यह उन्हें किसी भी प्रकार के भय, विपत्ति और नकारात्मक … Read more